जनाब कभी मिलें तो परिवार नियोजन की बात मत करिएगा. भूल कर भी 'हम दो, हमारे दो' का पाठ मत पढ़ाईएगा. महंगाई से बिल्कुल अछूते हैं. अगर 'मिया बीवी टिप-टॉप, दो के बाद फुल स्टॉप' की बात की तो जनाब आपको दुनिया के सबसे आश्चर्यजनक जानवर के रूप में देखेंगे. ये 3 पानी पिलाने वालों के साथ 3 क्रिकेट टीम तैयार कर लिए हैं. दर्शक खोजने की भी जरूरत नहीं पड़ती है. सचमुच ये पुरुष नहीं, महापुरूष हैं. घर के मैनेजमेंट, पत्नियों में और पत्नियों के साथ तारतम्यता मिलाकर चलने की अद्भूत कला सीखनी है तो 'राजा पाकिस्तानी' से जरूर मीलिए. अद्भूत प्रतिभा के खिलाड़ी हैं. जिंदगी को जिंदादिली से जीते हैं. 17 साल की उम्र में जिंदगी की पिच पर उतरे और 54 साल के होने का बावजूद क्रीज पर टिके हुए हैं. इन वर्षों में काफी उम्दा पारी खेली. जितना आप सोच नहीं सकते उससे आगे के खिलाड़ी हैं. सचिन, शिखर और विराट क्या शतक लगाएंगे. इनके आगे तो सब फेल हैं, ओसामा भी.
'एक लाख पूत, सवा लाख नाती', हमारे गांव में दशानन (रावण) के परिवार के बारे में कुछ ऐसा ही कहा जाता है. दशानन के परिवार के बारे में रामायण और कहानियों में ही जिक्र मिलता है. लेकिन 'राजा पाकिस्तानी' का दर्शन तो साक्षात कर सकते हैं. आज कल काफी परेशान चल रहे हैं. ठीक वैसे जैसे 'राजा हिंदुस्तानी' अपनी प्रेमिका से अलग होकर था. 'राजा हिंदुस्तानी' की तरह 'राजा पाकिस्तानी' अपने मन के राजा है. जो चाहें वो करें उनकी मर्जी.
फिलहाल उनकी मर्जी पर काले बादल मंडरा रहे हैं. काफी मायूस हैं. भारत की तरह उनके घर में भी आंदोलन शुरू हो गया है. पत्नियों ने उनकी मांगों को खारिज करते हुए उनका बहिष्कार कर दिया है. पत्नियों के बहिष्कार और पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन से इनके एक और हसीन सपने पर पानी फिर गया है. वैसे ही जैसे हमारे गांव के पती बाबा के. पाकिस्तान की सेना ने उनका सपना चकनाचूर कर दिया. सपना शादी करने का, सपना चौथी बीवी लाने का.
पाकिस्तान के 'राजा पाकिस्तानी' (गुलजार खान) 36 बच्चों के बाप हैं और इस समय सेना से खफा हैं. पाकिस्तानी सेना ने तालिबान के खिलाफ जो अभियान छेड़ा है, उसने उत्तरी वजीरिस्तान के हजारों लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है. 54 साल के गुलजार खान इनमें से एक हैं. अपना 35 कमरे का घर छोड़ कर परिवार के 100 से ज्यादा सदस्यों के साथ वह नए घर की तलाश में निकल पड़े हैं, अच्छे दिनों के इंतजार में भटक रहे हैं, जाहिर है इतने बड़े परिवार के साथ किसी एक जगह से दूसरी जगह जाकर दोबारा घर बसाना आसान नहीं. इसमें काफी खर्च है. मुर्झाए चेहरे के साथ गुलजार खान को अपनी चौथी शादी के लिए बचाए पैसे खर्च करने पड़ गए. चौथी शादी के पैसे खर्च होने के बाद गुलजार खान काफी नाराज चल रहे हैं. गुस्से में कहते हैं "मैंने जितना पैसा बचाया था सब शावा से बन्नु आने में खर्च हो गया. अब मैं एक बार फिर पैसे जुटाने में जुटा हूं और इंतजार कर रहा हूं कि सेना का यह ऑपरेशन पूरा हो."
उनकी मजबूरी कोई नहीं समझ रहा है. चौथी शादी करना उनकी मजबूरी है. हर पत्नी से उन्हें एक एक दर्जन बच्चे हो चुके हैं और अब वे और बच्चों के लिए राजी नहीं हैं, इसलिए उन्हें चौथी शादी का फैसला करना पड़ा. उनकी बीवियों ने तो उनका बहिष्कार कर दिया है. कहती हैं और बच्चे नहीं करेंगी. गुलजार का दर्द तो समझिए, कहते हैं 'बीवियां तो मुझे अपने करीब भी नहीं आने देतीं. मेरे भी तो कुछ अरमान हैं.'
'राजा पाकिस्तानी' 17 साल के थे जब उनकी पहली शादी हुई. घर वालों ने 14 साल की दूर की बहन से रिश्ता कराया. पहली पत्नी से उन्हें आठ बेटियां और चार बेटे हुए. इस शादी के आठ साल बाद उनकी दूसरी शादी 17 साल की लड़की से हुई. बड़ी खुशी से गुलजार अपनी दूसरी शादी की बात बतातें हैं. "मैं संतुष्ट नहीं था. मुझे और जरूरत थी, मेरा मतलब निजी पलों से है. मैं धोखा देने और गलत काम करने में विश्वास नहीं करता. इसलिए अपनी जरूरतें भी मैंने शादी के कानून के अंदर रह कर ही पूरी की हैं."
तीसरा शादी की कहानी सुनिए. तीसरी शादी अपने भाई की बेवा के साथ की. भाई की शादी के एक महीने बाद ही मौत हो गयी थी. पेशे से ड्राइवर गुलजार खान 1976 से 1992 के बीच दुबई में रह कर टैक्सी चलाई. अब उनके दो बेटे दुबई में टैक्सी चलाते हैं. हर महीने करीब 50,000 रुपये घर भेज देते हैं. बाप बेटे की कमाई से घर चलता है. गुलजार खान अपनी जिंदगी से खुश हैं, दिक्कत बस इतनी है कि ये याद नहीं रख पाते कि किस बच्चे की मां कौन है. गुलजार कहते हैं, "मैं आपको ये तो बता सकता हूं कि कौन सा बच्चा मेरा है, लेकिन कौन सा किसका है, ये मत पूछिए." गुलजार आगे कहते हैं, 'हर वक्त बच्चों से घिरे रहने का एक और नुकसान है, मैं जब सोने जाता हूं तो दो तीन बच्चे तो मेरे आसपास ही रहते हैं. ऐसे में बीवियों के साथ अकेले कुछ पल बिताना बहुत मुश्किल हो जाता है.' गुलजार खान से जब पूछा गया कि क्या वह किसी तरह की दवा का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्होंने कहा, "बारह साल पहले मुझे दिल का दौरा पड़ा था. डॉक्टर ने मुझे खुश रहने की सलाह दी है. और खुश मैं तभी रहता हूं जब मेरी जरूरतें पूरी होती हैं."
कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. बाप एक नंबरी तो बेटा दस नंबरी. गुलजार अपने बच्चों के लिए रोल मॉडल हैं. 14 साल का एक बेटा अपनी शादी के सपने संजो रहा है, "इंशाल्लाह मेरी भी कई शादियां होंगी और मैं भी अपने पिता की ही तरह कई बच्चे पैदा करूंगा."
ये तो एक गुलजार खान की कहानी है. पाकिस्तान में ऐसे कितने गुलजार हैं जो बिना सोचे गुल खिला रहे हैं. महंगाई और परिवार नियोजन के पचड़े में आप पड़िए. गुलजार के सपने अपने हैं, मुंगेरी लाल के नहीं. गुलजार के दर्द में कुछ बात है...कुछ स्वेत हैं, कुछ श्याम हैं.
'एक लाख पूत, सवा लाख नाती', हमारे गांव में दशानन (रावण) के परिवार के बारे में कुछ ऐसा ही कहा जाता है. दशानन के परिवार के बारे में रामायण और कहानियों में ही जिक्र मिलता है. लेकिन 'राजा पाकिस्तानी' का दर्शन तो साक्षात कर सकते हैं. आज कल काफी परेशान चल रहे हैं. ठीक वैसे जैसे 'राजा हिंदुस्तानी' अपनी प्रेमिका से अलग होकर था. 'राजा हिंदुस्तानी' की तरह 'राजा पाकिस्तानी' अपने मन के राजा है. जो चाहें वो करें उनकी मर्जी.
फिलहाल उनकी मर्जी पर काले बादल मंडरा रहे हैं. काफी मायूस हैं. भारत की तरह उनके घर में भी आंदोलन शुरू हो गया है. पत्नियों ने उनकी मांगों को खारिज करते हुए उनका बहिष्कार कर दिया है. पत्नियों के बहिष्कार और पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन से इनके एक और हसीन सपने पर पानी फिर गया है. वैसे ही जैसे हमारे गांव के पती बाबा के. पाकिस्तान की सेना ने उनका सपना चकनाचूर कर दिया. सपना शादी करने का, सपना चौथी बीवी लाने का.
पाकिस्तान के 'राजा पाकिस्तानी' (गुलजार खान) 36 बच्चों के बाप हैं और इस समय सेना से खफा हैं. पाकिस्तानी सेना ने तालिबान के खिलाफ जो अभियान छेड़ा है, उसने उत्तरी वजीरिस्तान के हजारों लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है. 54 साल के गुलजार खान इनमें से एक हैं. अपना 35 कमरे का घर छोड़ कर परिवार के 100 से ज्यादा सदस्यों के साथ वह नए घर की तलाश में निकल पड़े हैं, अच्छे दिनों के इंतजार में भटक रहे हैं, जाहिर है इतने बड़े परिवार के साथ किसी एक जगह से दूसरी जगह जाकर दोबारा घर बसाना आसान नहीं. इसमें काफी खर्च है. मुर्झाए चेहरे के साथ गुलजार खान को अपनी चौथी शादी के लिए बचाए पैसे खर्च करने पड़ गए. चौथी शादी के पैसे खर्च होने के बाद गुलजार खान काफी नाराज चल रहे हैं. गुस्से में कहते हैं "मैंने जितना पैसा बचाया था सब शावा से बन्नु आने में खर्च हो गया. अब मैं एक बार फिर पैसे जुटाने में जुटा हूं और इंतजार कर रहा हूं कि सेना का यह ऑपरेशन पूरा हो."
उनकी मजबूरी कोई नहीं समझ रहा है. चौथी शादी करना उनकी मजबूरी है. हर पत्नी से उन्हें एक एक दर्जन बच्चे हो चुके हैं और अब वे और बच्चों के लिए राजी नहीं हैं, इसलिए उन्हें चौथी शादी का फैसला करना पड़ा. उनकी बीवियों ने तो उनका बहिष्कार कर दिया है. कहती हैं और बच्चे नहीं करेंगी. गुलजार का दर्द तो समझिए, कहते हैं 'बीवियां तो मुझे अपने करीब भी नहीं आने देतीं. मेरे भी तो कुछ अरमान हैं.'
'राजा पाकिस्तानी' 17 साल के थे जब उनकी पहली शादी हुई. घर वालों ने 14 साल की दूर की बहन से रिश्ता कराया. पहली पत्नी से उन्हें आठ बेटियां और चार बेटे हुए. इस शादी के आठ साल बाद उनकी दूसरी शादी 17 साल की लड़की से हुई. बड़ी खुशी से गुलजार अपनी दूसरी शादी की बात बतातें हैं. "मैं संतुष्ट नहीं था. मुझे और जरूरत थी, मेरा मतलब निजी पलों से है. मैं धोखा देने और गलत काम करने में विश्वास नहीं करता. इसलिए अपनी जरूरतें भी मैंने शादी के कानून के अंदर रह कर ही पूरी की हैं."
तीसरा शादी की कहानी सुनिए. तीसरी शादी अपने भाई की बेवा के साथ की. भाई की शादी के एक महीने बाद ही मौत हो गयी थी. पेशे से ड्राइवर गुलजार खान 1976 से 1992 के बीच दुबई में रह कर टैक्सी चलाई. अब उनके दो बेटे दुबई में टैक्सी चलाते हैं. हर महीने करीब 50,000 रुपये घर भेज देते हैं. बाप बेटे की कमाई से घर चलता है. गुलजार खान अपनी जिंदगी से खुश हैं, दिक्कत बस इतनी है कि ये याद नहीं रख पाते कि किस बच्चे की मां कौन है. गुलजार कहते हैं, "मैं आपको ये तो बता सकता हूं कि कौन सा बच्चा मेरा है, लेकिन कौन सा किसका है, ये मत पूछिए." गुलजार आगे कहते हैं, 'हर वक्त बच्चों से घिरे रहने का एक और नुकसान है, मैं जब सोने जाता हूं तो दो तीन बच्चे तो मेरे आसपास ही रहते हैं. ऐसे में बीवियों के साथ अकेले कुछ पल बिताना बहुत मुश्किल हो जाता है.' गुलजार खान से जब पूछा गया कि क्या वह किसी तरह की दवा का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्होंने कहा, "बारह साल पहले मुझे दिल का दौरा पड़ा था. डॉक्टर ने मुझे खुश रहने की सलाह दी है. और खुश मैं तभी रहता हूं जब मेरी जरूरतें पूरी होती हैं."
कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. बाप एक नंबरी तो बेटा दस नंबरी. गुलजार अपने बच्चों के लिए रोल मॉडल हैं. 14 साल का एक बेटा अपनी शादी के सपने संजो रहा है, "इंशाल्लाह मेरी भी कई शादियां होंगी और मैं भी अपने पिता की ही तरह कई बच्चे पैदा करूंगा."
ये तो एक गुलजार खान की कहानी है. पाकिस्तान में ऐसे कितने गुलजार हैं जो बिना सोचे गुल खिला रहे हैं. महंगाई और परिवार नियोजन के पचड़े में आप पड़िए. गुलजार के सपने अपने हैं, मुंगेरी लाल के नहीं. गुलजार के दर्द में कुछ बात है...कुछ स्वेत हैं, कुछ श्याम हैं.

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