Sunday, July 13, 2014

हिंदुस्तान में हिंदुस्तानी भाषाओं से परहेज क्यों?

UPSC से सी-सैट प्रणाली हटाने के पक्ष में मैं भी हूं... हिंदी की बात करने पर तथाकथित अंग्रेजी जानने वालों का तर्क होता है कि जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती वही हिंदी की बात करते हैं. तो अंग्रेजी की वकालत करने वाले बताएं कि अगर उन्हें चीनी, जापानी, रसियन में प्रश्न पत्र मिले तो क्या करेंगे? विदेशी भाषाओं को छोड़िए, तेलगु, मराठी, तमिल, कन्नड़ में प्रश्न-पत्र मिले तो क्या लिखेंगे? भाषा की जानकारी रखना अच्छी बात है. हर किसी को कई भाषाओं की जानकारी लेने की कोशिश करनी चाहिए. लेकिन हिंदी, मराठी, तमिल, बंगाली या और कोई भारतीय भाषा बोलने वालों पर अंग्रेजी थोपना ठीक नहीं. वैसे प्रशासनिक सेवाओं में जरूरत की अंग्रेजी सबको आनी चाहिए. UPSC के माध्यम से चयनित छात्रों को देश में ही नौकरी करनी होती है. चयनित अधिकारियों को देवरिया, गोरखपुर, बक्सर, छपरा, पटना, पुणे जैसे जिलों में ड्यूटी बजानी पड़ती हैं. हां कुछ लोग कभी-कभी विदेश दौरे पर भी जाते हैं. उनके लिए अंग्रेजी की जानकारी जरूरी होती है. जिसके लिए अंग्रेजी माध्यम के छात्र मिल जाते हैं. सभी अधिकारी अमेरिका या ब्रिटेन में काम करने नहीं जाते. सी-सैट प्रणाली की वजह से छात्रों के ज्यादातर समय अंग्रेजी सीखने में ही खत्म हो जाता है. नतीजा ये होता है कि जरूरी जानकारी के अध्ययन के लिए समय नहीं मिलता. इसलिए सरकार को सी-सैट प्रणाली में सुधार करनी चाहिए. कोशिश होनी चाहिए कि चयन प्रक्रिया के बाद चयनित अधिकारियों को अंग्रेजी की जानकारी दी जाए. कोई जरूरी नहीं कि अंग्रेजी जानने वाला ज्ञानी हो. हिंदी, मराठी, ऊर्दू, तमिल, तेलगू जानने वाले को मूर्ख समझना मूर्खता की सबसे बड़ी पहचान होती है. अंग्रेजी जानना विकास और ज्ञानी होने का पैमाना नहीं. कई भाषा का ज्ञान अच्छी बात है लेकिन भाषाई भेद-भाव सबसे गंदी बात. अंग्रेजी को बढ़ावा देना सही लेकिन थोपना गलत. ये बिडंबना नहीं तो क्या है, 2013 की परीक्षा में कामयाब हुए 1122 छात्रों में सिर्फ़ 26 हिंदी माध्यम के हैं.
सवाल सिर्फ़ हिंदी का नहीं है 2013 की सिविल सेवा परीक्षा में सफल हिंदी छात्रों का प्रतिशत मात्र 2.3 ही है. जबकि 2003 से 2010 के बीच ऐसे छात्रों का प्रतिशत हमेशा 10 से ज़्यादा रहा है. 2009 में यह प्रतिशत 25.4 तक था. हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में परीक्षा देने वाले छात्र इसके लिए सी-सैट परीक्षा प्रणाली को ज़िम्मेदार मानते हैं.

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