Thursday, February 14, 2008

मैं तो....... क्योंकि मैं किसान हूँ ....

नेताजी पूछे तुम कौन हो ....?
मैंने बोला , मैं इन्सान हूँ ....क्या तेरे पास गाड़ी है ...?
हाँ मेरे पास बैलगाडी है ....नेताजी, वैश्वीकरण के इस युग में बैलगाडी.... ?
हाँ , ये भारत की सवारी है ...नेताजी , अरे ! मैं तो सस्ते दर पर क़र्ज़ की व्वस्था किया है ... ?
हाँ , इसीलिए मोतिया ने आत्महत्या किया है .... ?
नेताजी , आत्महत्या ? ये जरूर विपक्षी पार्टी की चाल है...?
नहीं, यह तो आपके कमीशन का कमाल है ....?
नेताजी , चलो ठीक है.... अब बताओ तुम्हारे घर क्या -क्या है...?
जानवरों के गोबर से जलाता हूँ चूल्हा, मिटटी का घर है लेकिन छत है खुला
पानी इतना है कि बस हो पाता है कुल्ला
खाने में सुखी रोटी और नसीब से दाल का दूल्हा
मैं तो दबा , कुचला एक इन्सान हूँ ............. क्योंकि मैं भारत का किसान हूँ ...

Wednesday, February 13, 2008

हाईटेक प्यार का मौसम

मौसम प्यार का हुआ हाईटेक
प्रेम की भाषा अब मेल, मैसेजिंग-चैटिंग
अब मेघ ना लाए संदेश
एस एम एस ने ओढा पत्र का वेष
जज़्बात नही अब बस जिस्म बोलते
जिस्म क्या, दिल भी अब रोज बदलते
वो दिन थे, जब प्रेमिका दे काढे रुमाल
जिसमें भरा था प्यार का अलग खुमार
कूल हैं, हम फिर भी फूल है
चूँकि, आत्मीयता ,आवेग और प्रतिबद्धता की बत्ती गुल है ।