ऑस्ट्रेलिया में "आषाढ़ का एक दिन" का मंचन
"…फिर धीरे-धीरे धीमा पड़कर विलीन हो जाता है।
परदा धीरे-धीरे उठता है।"
~ मोहन राकेश, 'आषाढ़ का एक दिन'
“आषाढ का पहला दिन और ऐसी वर्षा माँ! ऐसी धारासार वर्षा! दूर-दूर तक की उपत्यकाएँ भीग गईं।”
~ मोहन राकेश, ‘आषाढ़ का एक दिन’
तस्वीरें @iawoolford के ट्विटर वॉल से ली गई हैं।





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