Saturday, August 29, 2015

#मोहन_राकेश #ऑस्ट्रेलिया #हिंदी

ऑस्ट्रेलिया में "आषाढ़ का एक दिन" का मंचन
"…फिर धीरे-धीरे धीमा पड़कर विलीन हो जाता है। परदा धीरे-धीरे उठता है।" ~ मोहन राकेश, 'आषाढ़ का एक दिन'
 “आषाढ का पहला दिन और ऐसी वर्षा माँ! ऐसी धारासार वर्षा! दूर-दूर तक की उपत्यकाएँ भीग गईं।”
~ मोहन राकेश, ‘आषाढ़ का एक दिन’


 हम लोग थियेटर में बैठकर "आषाढ़ का एक दिन" देखने को तैयार है! क्या बात है

तस्वीरें @iawoolford के ट्विटर वॉल से ली गई हैं।

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